आईने का शाप

Horror all age range 100 to 300 words Hindi

Story Content

रात के ठीक बारह बजे थे। बारिश थम गई थी, मगर हवाएँ डरावनी आवाज़ें कर रही थीं। रवि, अकेला अपने नए, सस्ते किराए के घर में बैठा, घबराया हुआ था।
तभी, ऊपर के कमरे से कदमों की आहट सुनाई दी।
टक… टक… टक…
रवि को लगा, शायद उसे भ्रम हो रहा है। लेकिन फिर किसी ने उसका नाम धीमे से पुकारा—
रवि…”
डर से उसका खून जम गया। घर में वह अकेला था।
हिम्मत जुटाकर वह सीढ़ियाँ चढ़ा। ऊपर का कमरा बंद था। दरवाज़ा खोलते ही, उसने आईने में खुद को पाया… पर उसकी आँखें काली थीं और चेहरा शैतानी मुस्कान लिए हुए था।
आईने में मौजूद रवि ने कहा, “तू देर से आया है… अब मेरी बारी खत्म।”
बिजली चली गई, और एक भयानक चीख गूंजी।
सुबह, पड़ोसियों ने घर का दरवाजा खुला पाया। अंदर रवि का फोन पड़ा था, जिस पर आख़िरी आवाज़ रिकॉर्ड हुई थी—
“अगर तुम यह सुन रहे हो… तो आईने में मत देखना…”
कहा जाता है कि उस घर में आज भी रात बारह बजे किसी के चलने की आवाज़ आती है… और कोई फुसफुसाता है—“अब मेरी बारी है”।